श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 123:  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  5.123.d1 
(स भवान् सुहृदां पथ्यं वचो गृह्णातु मानृतम्।
समर्थैर्विग्रहं कृत्वा विषमस्थो भविष्यसि॥ )
 
 
अनुवाद
तुम्हें अपने मित्रों की हितकारी बातें मान लेनी चाहिए। असत्य आचरण नहीं अपनाना चाहिए, अन्यथा शक्तिशाली पाण्डवों से युद्ध करने का निश्चय करके तुम बड़ी मुसीबत में पड़ जाओगे।
 
You should accept the beneficial words of your friends. Do not adopt untruthful conduct, otherwise by deciding to fight with the powerful Pandavas, you will get into a big problem.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)