श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 123:  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.123.2 
अभिवृष्टश्च वर्षेण नानापुष्पसुगन्धिना।
परिष्वक्तश्च पुण्येन वायुना पुण्यगन्धिना॥ २॥
 
 
अनुवाद
वहाँ नाना प्रकार के सुगन्धित पुष्प उन पर बरस रहे थे। पवित्र सुगन्ध से सुगन्धित पवित्र वायु उन्हें चारों ओर से आलिंगन कर रही थी॥2॥
 
There, various kinds of fragrant flowers showered upon him. The holy breeze perfumed with sacred fragrance was embracing him from all sides.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)