श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 123:  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.123.19 
नारद उवाच
एष दोषोऽभिमानेन पुरा प्राप्तो ययातिना।
निर्बध्नतातिमात्रं च गालवेन महीपते॥ १९॥
 
 
अनुवाद
नारद जी कहते हैं, 'हे राजन! पूर्वकाल में राजा ययाति अपने अभिमान के कारण संकट में पड़ गए थे और उनके हठ तथा हठ के कारण महर्षि गालव को महान कष्ट सहना पड़ा था।
 
Narada says, 'O King! In the past, King Yayati had got into trouble due to his pride and Maharishi Galav had to undergo great pain due to his insistence and stubbornness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)