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mahabharat 5.123.17: हे राजन! तुम्हें कभी भी उच्च, निम्न और मध्यम वर्ग के लोगों का अपमान नहीं करना चाहिए। जो लोग अहंकार की अग्नि में जल रहे हैं, उनके क्रोध को शांत करने का कोई उपाय नहीं है॥17॥   |   mahabharat अध्याय 5.123:   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.123.17 
नावमान्यास्त्वया राजन्नधमोत्कृष्टमध्यमा:।
न हि मानप्रदग्धानां कश्चिदस्ति शम: क्वचित्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! तुम्हें कभी भी उच्च, निम्न और मध्यम वर्ग के लोगों का अपमान नहीं करना चाहिए। जो लोग अहंकार की अग्नि में जल रहे हैं, उनके क्रोध को शांत करने का कोई उपाय नहीं है॥17॥
 
O King! You should never insult people of high, low and middle class. There is no way to calm the anger of those who are burning in the fire of pride. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)