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mahabharat 5.122.17: ययाति के वे चारों पुत्र वंश की वृद्धि करने वाले चार वंशों में उत्पन्न हुए। अपने यज्ञ और दान से उत्पन्न धर्म के द्वारा उन्होंने महामुनि मातामह ययाति को स्वर्ग भेज दिया। 17॥   |   mahabharat अध्याय 5.122: सत्संग एवं दौहित्रोंके पुण्यदानसे ययातिका पुन: स्वर्गारोहण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 122: सत्संग एवं दौहित्रोंके पुण्यदानसे ययातिका पुन: स्वर्गारोहण  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.122.17 
दौहित्रा: स्वेन धर्मेण यज्ञदानकृतेन वै।
चतुर्षु राजवंशेषु सम्भूता: कुलवर्धना:।
मातामहं महाप्राज्ञं दिवमारोपयन्त ते॥ १७॥
 
 
अनुवाद
ययाति के वे चारों पुत्र वंश की वृद्धि करने वाले चार वंशों में उत्पन्न हुए। अपने यज्ञ और दान से उत्पन्न धर्म के द्वारा उन्होंने महामुनि मातामह ययाति को स्वर्ग भेज दिया। 17॥
 
Those four sons of Yayati who increased their dynasty were born in four dynasties. Through the religion born out of his yagya and charity, he sent that great sage Matamah Yayati to heaven. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)