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mahabharat 5.122.12: इसके बाद माधवी के छोटे पुत्र कुशिकवंशी धर्मज्ञ राजर्षि अष्टकणे, जिन्होंने सैकड़ों यज्ञ किये थे, नहुषानन्दन ययाति के पास जाकर बोले- 12॥   |   mahabharat अध्याय 5.122: सत्संग एवं दौहित्रोंके पुण्यदानसे ययातिका पुन: स्वर्गारोहण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 122: सत्संग एवं दौहित्रोंके पुण्यदानसे ययातिका पुन: स्वर्गारोहण  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.122.12 
अष्टकस्त्वथ राजर्षि: कौशिको माधवीसुत:।
अनेकशतयज्वानं नाहुषं प्राप्य धर्मवित्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद माधवी के छोटे पुत्र कुशिकवंशी धर्मज्ञ राजर्षि अष्टकणे, जिन्होंने सैकड़ों यज्ञ किये थे, नहुषानन्दन ययाति के पास जाकर बोले- 12॥
 
After this, Madhavi's younger son, Kushikvanshi religious sage Rajarishi Ashtakane, who performed hundreds of yagyas, went to Nahushanandan Yayati and said - 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)