Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.121.7: राजकुमार! आप अत्यंत मदमस्त हैं और यहाँ ऐसा कोई महान व्यक्ति नहीं है जिसका आप तिरस्कार न करते हों। इसी विश्वास के कारण आप अपने स्थान से गिर रहे हैं। अब आप यहाँ रहने के योग्य नहीं हैं।' | mahabharat अध्याय 5.121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतीव मदमत्तस्त्वं न कंचिन्नावमन्यसे।
मानेन भ्रष्ट: स्वर्गस्ते नार्हस्त्वं पार्थिवात्मज॥ ७॥
अनुवाद
राजकुमार! आप अत्यंत मदमस्त हैं और यहाँ ऐसा कोई महान व्यक्ति नहीं है जिसका आप तिरस्कार न करते हों। इसी विश्वास के कारण आप अपने स्थान से गिर रहे हैं। अब आप यहाँ रहने के योग्य नहीं हैं।'
‘Prince! You are extremely intoxicated and there is no great person here whom you do not despise. Because of this belief you are falling from your place. Now you are not fit to stay here. 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥