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mahabharat 5.121.6: राजन! इतने में ही देवताओं के राजा की आज्ञा से स्वर्ग से पुण्यात्मा पुरुषों को गिरा देने वाला एक पुरुष वहाँ आया और ययाति से इस प्रकार बोला -॥6॥   |   mahabharat अध्याय 5.121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.121.6 
अथैत्य पुरुष: कश्चित् क्षीणपुण्यनिपातक:।
ययातिमब्रवीद् राजन् देवराजस्य शासनात्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
राजन! इतने में ही देवताओं के राजा की आज्ञा से स्वर्ग से पुण्यात्मा पुरुषों को गिरा देने वाला एक पुरुष वहाँ आया और ययाति से इस प्रकार बोला -॥6॥
 
King! Meanwhile, a person who throws down virtuous men from heaven came there by the order of the King of Gods and spoke to Yayati thus -॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)