Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.121.28: इतने में ही गालव ऋषि भी वन से वहाँ आ पहुँचे और राजा से इस प्रकार बोले - 'महाराज! मेरी तपस्या का आठवाँ भाग लेकर उसके बल से स्वर्ग को प्राप्त करो।'॥28॥   |   mahabharat अध्याय 5.121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.121.28 
अथ तस्मादुपगतो गालवोऽप्याह पार्थिवम्।
तपसो मेऽष्टभागेन स्वर्गमारोहतां भवान्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
इतने में ही गालव ऋषि भी वन से वहाँ आ पहुँचे और राजा से इस प्रकार बोले - 'महाराज! मेरी तपस्या का आठवाँ भाग लेकर उसके बल से स्वर्ग को प्राप्त करो।'॥28॥
 
Meanwhile the sage Galava also arrived there from the forest and addressed the king thus - 'Maharaj! Take one-eighth of my austerity and by its power reach heaven.'॥ 28॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि गालवचरिते ययातिस्वर्गभ्रंशे एकविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें गालवचरित्रके प्रसंगमें ययातिका स्वर्गलोकसे पतनविषयक एक सौ इक्‍कीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२१॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)