Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.121.25-26h: पृथ्वी के स्वामी! मैंने भी बहुत-सा धर्म संचित किया है। कृपया उसका आधा भाग ग्रहण करें। हे राजन! सभी मनुष्य अपनी सन्तानों के पुण्यों का फल भोगते हैं। इसीलिए वे भी आपकी तरह पौत्रों की कामना करते हैं।॥25 1/2॥ | mahabharat अध्याय 5.121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पृथ्वी के स्वामी! मैंने भी बहुत-सा धर्म संचित किया है। कृपया उसका आधा भाग ग्रहण करें। हे राजन! सभी मनुष्य अपनी सन्तानों के पुण्यों का फल भोगते हैं। इसीलिए वे भी आपकी तरह पौत्रों की कामना करते हैं।॥25 1/2॥
‘Lord of the Earth! I have also accumulated a great deal of Dharma. Please accept half of it. O King! All men share the fruits of the good deeds done by their children. That is why they desire grandchildren, just as you did.’॥ 25 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥