Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.121.23: तत्पश्चात् तपस्विनी माधवी ने पुत्रों के सिर पर हाथ रखकर अपने पिता से कहा- 'राजेन्द्र! ये सभी आपके पौत्र और मेरे पुत्र हैं, पराये नहीं हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.121.23 
स्पृष्ट्वा मूर्धनि तान् पुत्रांस्तापसी वाक्यमब्रवीत्।
दौहित्रास्तव राजेन्द्र मम पुत्रा न ते परा:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् तपस्विनी माधवी ने पुत्रों के सिर पर हाथ रखकर अपने पिता से कहा- 'राजेन्द्र! ये सभी आपके पौत्र और मेरे पुत्र हैं, पराये नहीं हैं।
 
Thereafter the ascetic Madhavi placed her hand on the heads of the sons and said to her father- 'Rajendra! All of them are your grandsons and my sons, they are not strangers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)