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mahabharat 5.121.22: ये शब्द सुनकर माधवी बहुत प्रसन्न हुई और अपने पिता ययाति के पास गई और उन्हें प्रणाम किया।   |   mahabharat अध्याय 5.121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.121.22 
तेषां तद् भाषितं श्रुत्वा माधवी परया मुदा।
पितरं समुपागच्छद् ययातिं सा ववन्द च॥ २२॥
 
 
अनुवाद
ये शब्द सुनकर माधवी बहुत प्रसन्न हुई और अपने पिता ययाति के पास गई और उन्हें प्रणाम किया।
 
Madhavi was very pleased to hear these words. She went to her father Yayati and bowed to him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)