Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.121.20-21: नारदजी कहते हैं- इसी समय उन राजाओं ने अपनी माता माधवी को देखा, जो मृग के समान उनके साथ विचरण करती हुई धीरे-धीरे वहाँ पहुँची थीं। उन्हें प्रणाम करके राजाओं ने पूछा- 'तपस्वी! आपके यहाँ आने का क्या प्रयोजन है? आपकी कौन-सी आज्ञा का हमें पालन करना चाहिए? हम सब आपके पुत्र हैं, अतः आप हमें उचित सेवा की आज्ञा दीजिए।' | mahabharat अध्याय 5.121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नारदजी कहते हैं- इसी समय उन राजाओं ने अपनी माता माधवी को देखा, जो मृग के समान उनके साथ विचरण करती हुई धीरे-धीरे वहाँ पहुँची थीं। उन्हें प्रणाम करके राजाओं ने पूछा- 'तपस्वी! आपके यहाँ आने का क्या प्रयोजन है? आपकी कौन-सी आज्ञा का हमें पालन करना चाहिए? हम सब आपके पुत्र हैं, अतः आप हमें उचित सेवा की आज्ञा दीजिए।'
Naradji says- At this time, those kings saw their mother Madhavi, who had gradually reached there roaming with them like a deer. After saluting her, the kings asked- 'Ascetic! What is the purpose of your coming here? Which of your orders should we follow? We are all your sons; hence, please give us orders for proper service.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥