Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.121.2: उसके शरीर से दिव्य पुष्पों की माला सूख गई। उसका ज्ञान क्षीण होने लगा। उसके मुकुट और बाजूबंद गिर पड़े। उसे चक्कर आने लगे। उसके सारे अंग दुर्बल हो गए और उसके वस्त्र तथा आभूषण भी फिसलकर गिरने लगे॥2॥   |   mahabharat अध्याय 5.121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.121.2 
म्लानस्रग्भ्रष्टविज्ञान: प्रभ्रष्टमुकुटाङ्गद:।
विघूर्णन् स्रस्तसर्वाङ्ग: प्रभ्रष्टाभरणाम्बर:॥ २॥
 
 
अनुवाद
उसके शरीर से दिव्य पुष्पों की माला सूख गई। उसका ज्ञान क्षीण होने लगा। उसके मुकुट और बाजूबंद गिर पड़े। उसे चक्कर आने लगे। उसके सारे अंग दुर्बल हो गए और उसके वस्त्र तथा आभूषण भी फिसलकर गिरने लगे॥2॥
 
The garland of divine flowers that he was wearing withered away. His knowledge started to fade away. His crown and armlets fell off his body. He started feeling dizzy. All his limbs became weak and his clothes and ornaments also started slipping and falling.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)