Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.121.15-16: दिव्य तेज से प्रकाशित उस राजा से संसार के समस्त राजाओं ने पूछा, 'आप कौन हैं? किसके भाई हैं और किस देश तथा नगर में रहते हैं? आप यक्ष हैं या देवता? आप गन्धर्व हैं या राक्षस? आपका स्वरूप मनुष्यों जैसा नहीं है। आप किस प्रयोजन की सिद्धि चाहते हैं, यह बताइए?'॥15-16॥ | mahabharat अध्याय 5.121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तमाहु: पार्थिवा: सर्वे दीप्यमानमिव श्रिया।
को भवान् कस्य वा बन्धुर्देशस्य नगरस्य वा॥ १५॥
यक्षो वाप्यथवा देवो गन्धर्वो राक्षसोऽपि वा।
न हि मानुषरूपोऽसि को वार्थ: काङ्क्षॺते त्वया॥ १६॥
अनुवाद
दिव्य तेज से प्रकाशित उस राजा से संसार के समस्त राजाओं ने पूछा, 'आप कौन हैं? किसके भाई हैं और किस देश तथा नगर में रहते हैं? आप यक्ष हैं या देवता? आप गन्धर्व हैं या राक्षस? आपका स्वरूप मनुष्यों जैसा नहीं है। आप किस प्रयोजन की सिद्धि चाहते हैं, यह बताइए?'॥15-16॥
All the kings of the world asked that king who was shining with his divine radiance, 'Who are you? Whose brother are you and in which country and city do you reside? Are you a Yaksh or a Devta? Are you a Gandharva or a Rakshasa? Your form is not like that of humans. Tell me, what purpose do you want to accomplish?'॥15-16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥