Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.121.14: वे चारों महान राजा यज्ञों की आहुति पाकर प्रज्वलित होने वाली चार प्रचण्ड अग्नियों के समान तेजस्वी थे। जब ययाति ऋषि अपना पुण्य खो बैठे, तब वे उनके बीच में गिर पड़े॥14॥ | mahabharat अध्याय 5.121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
चतुर्षु हुतकल्पेषु राजसिंहमहाग्निषु।
पपात मध्ये राजर्षिर्ययाति: पुण्यसंक्षये॥ १४॥
अनुवाद
वे चारों महान राजा यज्ञों की आहुति पाकर प्रज्वलित होने वाली चार प्रचण्ड अग्नियों के समान तेजस्वी थे। जब ययाति ऋषि अपना पुण्य खो बैठे, तब वे उनके बीच में गिर पड़े॥14॥
Those four great kings were as radiant as the four huge fires which are ablaze after receiving the offerings of sacrifices. When the sage Yayati lost his virtue, he fell in the middle of them.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥