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mahabharat 5.121.10-11h: वहां प्रतर्दन, वसुमना, औशीनर शिबि और अष्टक नामक चार राजाओं ने वाजपेय यज्ञ करके भगवान हरि को संतुष्ट किया।   |   mahabharat अध्याय 5.121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  5.121.10-11h 
प्रतर्दनो वसुमना: शिबिरौशीनरोऽष्टक:॥ १०॥
वाजपेयेन यज्ञेन तर्पयन्ति सुरेश्वरम्।
 
 
अनुवाद
वहां प्रतर्दन, वसुमना, औशीनर शिबि और अष्टक नामक चार राजाओं ने वाजपेय यज्ञ करके भगवान हरि को संतुष्ट किया।
 
There, the four kings, Pratardana, Vasumana, Aushinara Shibi and Ashtak, satisfied Lord Hari by performing the Vajapeya sacrifice.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)