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mahabharat 5.120.7: व्रत और नाना प्रकार की दीक्षाओं और नियमों का पालन करके उसने अपने मन को राग-द्वेष रूपी विकारों से मुक्त कर लिया और हिरणी की भाँति वन में विचरण करने लगी॥7॥   |   mahabharat अध्याय 5.120: माधवीका वनमें जाकर तप करना तथा ययातिका स्वर्गमें जाकर सुखभोगके पश्चात् मोहवश तेजोहीन होना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 120: माधवीका वनमें जाकर तप करना तथा ययातिका स्वर्गमें जाकर सुखभोगके पश्चात् मोहवश तेजोहीन होना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.120.7 
उपवासैश्च विविधैर्दीक्षाभिर्नियमैस्तथा।
आत्मनो लघुतां कृत्वा बभूव मृगचारिणी॥ ७॥
 
 
अनुवाद
व्रत और नाना प्रकार की दीक्षाओं और नियमों का पालन करके उसने अपने मन को राग-द्वेष रूपी विकारों से मुक्त कर लिया और हिरणी की भाँति वन में विचरण करने लगी॥7॥
 
By fasting and following various types of initiations and rules, she freed her mind from the vices of attachment and hatred and started wandering in the forest like a deer. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)