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mahabharat 5.120.6: ययातिनन्दिनी कुमारी माधवी रथ से उतरकर अपने पिता, भाई, बन्धुओं आदि को नमस्कार करके पुण्यमय तपोवन में गई और वहाँ तपस्या करने लगी॥6॥   |   mahabharat अध्याय 5.120: माधवीका वनमें जाकर तप करना तथा ययातिका स्वर्गमें जाकर सुखभोगके पश्चात् मोहवश तेजोहीन होना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 120: माधवीका वनमें जाकर तप करना तथा ययातिका स्वर्गमें जाकर सुखभोगके पश्चात् मोहवश तेजोहीन होना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.120.6 
अवतीर्य रथात् कन्या नमस्कृत्य च बन्धुषु।
उपगम्य वनं पुण्यं तपस्तेपे ययातिजा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
ययातिनन्दिनी कुमारी माधवी रथ से उतरकर अपने पिता, भाई, बन्धुओं आदि को नमस्कार करके पुण्यमय तपोवन में गई और वहाँ तपस्या करने लगी॥6॥
 
Yayatinandini Kumari Madhavi got down from the chariot, greeted her father, brother, brothers etc. and went to the virtuous Tapovan and started doing penance there. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)