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mahabharat 5.120.3: उस स्वयंवर में नाग, यक्ष, मनुष्य, गन्धर्व, पशु, पक्षी तथा पर्वत, वृक्ष और वन में रहने वाले प्राणियों का स्वागत किया गया॥3॥   |   mahabharat अध्याय 5.120: माधवीका वनमें जाकर तप करना तथा ययातिका स्वर्गमें जाकर सुखभोगके पश्चात् मोहवश तेजोहीन होना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 120: माधवीका वनमें जाकर तप करना तथा ययातिका स्वर्गमें जाकर सुखभोगके पश्चात् मोहवश तेजोहीन होना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.120.3 
नागयक्षमनुष्याणां गन्धर्वमृगपक्षिणाम्।
शैलद्रुमवनौकानामासीत् तत्र समागम:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उस स्वयंवर में नाग, यक्ष, मनुष्य, गन्धर्व, पशु, पक्षी तथा पर्वत, वृक्ष और वन में रहने वाले प्राणियों का स्वागत किया गया॥3॥
 
In that swayamvar, snakes, yakshas, ​​humans, Gandharvas, animals, birds and the creatures living in mountains, trees and forests were welcomed. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)