सर्वे ते ह्यावृतज्ञाना नाभ्यजानन्त तं नृपम्।
स मुहूर्तादथ नृपो हतौजाश्चाभवत् तदा॥ २२॥
अनुवाद
उन सबके ज्ञान पर पर्दा पड़ा था, इसलिए वे राजा को पहचान नहीं सके। फिर दो घड़ी में ही राजा ययाति का तेज नष्ट हो गया।
All of them had a veil over their knowledge; therefore they could not recognize the king. Then within two hours, the glory of king Yayatti was destroyed.
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि गालवचरिते ययातिमोहे विंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें गालवचरित्रके प्रसंगमें ययातिमोहविषयक एक सौ बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२०॥