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mahabharat 5.120.21: विमान के सैकड़ों रक्षकों, स्वर्ग के द्वारपालों और सिंहासन के रक्षकों से पूछा गया; परंतु सबने एक ही उत्तर दिया - 'हम उसे नहीं जानते।'॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 5.120: माधवीका वनमें जाकर तप करना तथा ययातिका स्वर्गमें जाकर सुखभोगके पश्चात् मोहवश तेजोहीन होना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 120: माधवीका वनमें जाकर तप करना तथा ययातिका स्वर्गमें जाकर सुखभोगके पश्चात् मोहवश तेजोहीन होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.120.21 
विमानपाला: शतश: स्वर्गद्वाराभिरक्षिण:।
पृष्टा आसनपालाश्च न जानीमेत्यथाब्रुवन्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
विमान के सैकड़ों रक्षकों, स्वर्ग के द्वारपालों और सिंहासन के रक्षकों से पूछा गया; परंतु सबने एक ही उत्तर दिया - 'हम उसे नहीं जानते।'॥ 21॥
 
Hundreds of guards of the aircraft, gatekeepers of heaven and protectors of the throne were asked; but all of them gave the same answer - 'We do not know him.'॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)