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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 120: माधवीका वनमें जाकर तप करना तथा ययातिका स्वर्गमें जाकर सुखभोगके पश्चात् मोहवश तेजोहीन होना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.120.20 
एवं विचारयन्तस्ते राजानं स्वर्गवासिन:।
दृष्ट्वा पप्रच्छुरन्योन्यं ययातिं नृपतिं प्रति॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार विचार करते हुए स्वर्गवासी एक दूसरे से ययाति के विषय में प्रश्न पूछने लगे।
 
Thinking in this manner, the people of heaven began to ask each other questions about Yayati.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)