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mahabharat 5.120.19: ‘उसने किन कर्मों से यह सिद्धि प्राप्त की है? उसने कहाँ तपस्या की है? स्वर्ग में उसे कैसे जाना जा सकता है अथवा यहाँ उसे कौन जानता है?’॥19॥   |   mahabharat अध्याय 5.120: माधवीका वनमें जाकर तप करना तथा ययातिका स्वर्गमें जाकर सुखभोगके पश्चात् मोहवश तेजोहीन होना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 120: माधवीका वनमें जाकर तप करना तथा ययातिका स्वर्गमें जाकर सुखभोगके पश्चात् मोहवश तेजोहीन होना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.120.19 
कर्मणा केन सिद्धोऽयं क्व वानेन तपश्चितम्।
कथं वा ज्ञायते स्वर्गे केन वा ज्ञायतेऽप्युत॥ १९॥
 
 
अनुवाद
‘उसने किन कर्मों से यह सिद्धि प्राप्त की है? उसने कहाँ तपस्या की है? स्वर्ग में उसे कैसे जाना जा सकता है अथवा यहाँ उसे कौन जानता है?’॥19॥
 
‘By what deeds has he achieved this success? Where has he performed penance? How can he be known in heaven or who knows him here?’॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)