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mahabharat 5.120.17: तत्पश्चात बलसूदन इन्द्रदेव को ययाति की स्थिति ज्ञात हुई। उस समय वे सभी राजा भी ययाति को शाप देने लगे।   |   mahabharat अध्याय 5.120: माधवीका वनमें जाकर तप करना तथा ययातिका स्वर्गमें जाकर सुखभोगके पश्चात् मोहवश तेजोहीन होना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 120: माधवीका वनमें जाकर तप करना तथा ययातिका स्वर्गमें जाकर सुखभोगके पश्चात् मोहवश तेजोहीन होना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.120.17 
ततस्तं बुबुधे देव: शक्रो बलनिषूदन:।
ते च राजर्षय: सर्वे धिग्धिगित्येवमब्रुवन्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात बलसूदन इन्द्रदेव को ययाति की स्थिति ज्ञात हुई। उस समय वे सभी राजा भी ययाति को शाप देने लगे।
 
Thereafter Balasudan Indradev came to know about Yayati's condition. All those kings also started cursing Yayati at that time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)