Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.120.15-16: इस प्रकार वहाँ अनेक पुण्यों से युक्त हजारों वर्ष बीत गए । उस दिव्य वैभव को देखकर ययात का मन स्वयं विस्मित हो गया । उसकी बुद्धि मोह से व्याकुल हो गई और वह देवताओं, मनुष्यों और ऋषियों की उपेक्षा करने लगा, यहाँ तक कि जब परम ऐश्वर्यशाली और महान राजा उसके पास बैठे थे ॥15-16॥ | mahabharat अध्याय 5.120: माधवीका वनमें जाकर तप करना तथा ययातिका स्वर्गमें जाकर सुखभोगके पश्चात् मोहवश तेजोहीन होना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस प्रकार वहाँ अनेक पुण्यों से युक्त हजारों वर्ष बीत गए । उस दिव्य वैभव को देखकर ययात का मन स्वयं विस्मित हो गया । उसकी बुद्धि मोह से व्याकुल हो गई और वह देवताओं, मनुष्यों और ऋषियों की उपेक्षा करने लगा, यहाँ तक कि जब परम ऐश्वर्यशाली और महान राजा उसके पास बैठे थे ॥15-16॥
In this way, thousands of years of time filled with many virtues passed there. Yayat's mind itself became astonished to see its heavenly splendor. His intellect was overcome by delusion and he started ignoring all the gods, humans and sages even when the most prosperous and great kings were sitting near him.॥15-16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥