Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.120.1: नारद जी कहते हैं: तत्पश्चात राजा ययाति पुनः माधवी के स्वयंवर के विषय में विचार करके गंगा-यमुना के संगम पर स्थित अपने आश्रम में रहने चले गये। | mahabharat अध्याय 5.120: माधवीका वनमें जाकर तप करना तथा ययातिका स्वर्गमें जाकर सुखभोगके पश्चात् मोहवश तेजोहीन होना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नारद उवाच
स तु राजा पुनस्तस्या: कर्तुकाम: स्वयंवरम्।
उपगम्याश्रमपदं गङ्गायमुनसंगमे॥ १॥
अनुवाद
नारद जी कहते हैं: तत्पश्चात राजा ययाति पुनः माधवी के स्वयंवर के विषय में विचार करके गंगा-यमुना के संगम पर स्थित अपने आश्रम में रहने चले गये।
Narada says: Thereafter King Yayati, after once again thinking about Madhavi's swayamvara, went to live in his hermitage situated at the confluence of Ganga and Yamuna.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥