श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.12.9 
देवा ऊचु:
इन्द्राणीमानयिष्यामो यथेच्छसि दिवस्पते।
जहि क्रोधमिमं वीर प्रीतो भव सुरेश्वर॥ ९॥
 
 
अनुवाद
देवताओं ने कहा- हे वीर देवेश्वर, स्वर्ग के स्वामी! आपकी इच्छानुसार हम इन्द्राणी को आपकी सेवा में लाएँगे। आप इस क्रोध को त्यागकर प्रसन्न हो जाएँ॥ 9॥
 
The gods said— O brave Deveshwar, the lord of heaven! As per your wish, we will bring Indrani to your service. Please leave this anger and be happy.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)