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mahabharat 5.12.8: देवी शची मेरी सेवा में उपस्थित रहें। यही उनके हित में है और हे देवताओं! ऐसा होने पर ही तुम्हारा सदैव कल्याण होगा।॥8॥   |   mahabharat अध्याय 5.12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.12.8 
उपतिष्ठतु देवी मामेतदस्या हितं परम्।
युष्माकं च सदा देवा: शिवमेवं भविष्यति॥ ८॥
 
 
अनुवाद
देवी शची मेरी सेवा में उपस्थित रहें। यही उनके हित में है और हे देवताओं! ऐसा होने पर ही तुम्हारा सदैव कल्याण होगा।॥8॥
 
May goddess Shachi be present in my service. This is in their best interest and O gods! Only if this happens will you always prosper.'॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)