श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.12.7 
बहूनि च नृशंसानि कृतानीन्द्रेण वै पुरा।
वैधर्म्याण्युपधाश्चैव स व: किं न निवारित:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल में इन्द्र ने अनेक क्रूर कर्म किये हैं। उसने अनेक अधार्मिक कार्य और छल-कपट किये हैं। आपने उसे क्यों नहीं रोका?॥7॥
 
‘In ancient times, Indra has committed many cruel acts. Many adharmic acts and frauds have been committed by him. Why did you not stop him?॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)