श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.12.6 
अहल्या धर्षिता पूर्वमृषिपत्नी यशस्विनी।
जीवतो भर्तुरिन्द्रेण स व: किं न निवारित:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे देवताओं! पूर्वकाल में जब इन्द्र ने गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या का सतीत्व नष्ट किया था, तब आपने उसे क्यों नहीं रोका?॥6॥
 
O Gods! When in the past Indra had destroyed the chastity of the famous sage's wife Ahalya while her husband Gautama was still alive, why did you not stop him at that time?॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)