श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.12.32 
दृष्ट्वा तां नहुषश्चापि वयोरूपसमन्विताम्।
समहृष्यत दुष्टात्मा कामोपहतचेतन:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
दुष्ट नहुष इन्द्राणी को उनके नवीन आयु और सुन्दर रूप में देखकर अत्यन्त प्रसन्न हुआ। वह काम के कारण अपनी सुध-बुध खो बैठा था। 32.
 
The evil Nahush became very happy on seeing Indrani adorned with her new age and beautiful form. He had lost his senses due to lust. 32.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि सेनोद्योगपर्वणि इन्द्राणीकालावधियाचने द्वादशोऽध्याय:॥ १२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत सेनोद्योगपर्वमें इन्द्राणीकी नहुषसे समययाचनासे सम्बन्ध रखनेवाला बारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)