श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.12.31 
एवं विनिश्चयं कृत्वा इन्द्राणी कार्यसिद्धये।
अभ्यगच्छत सव्रीडा नहुषं घोरदर्शनम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
अपने कार्य की सिद्धि के लिए ऐसा निश्चय करके इन्द्राणी बड़ी हिचकिचाहट के साथ नहुष के पास गयी, जिसका स्वरूप बड़ा भयानक था।31.
 
Having made this determination for the accomplishment of her task, Indrani went with great hesitation to Nahush who had a fearsome appearance. 31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)