श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.12.27 
शल्य उवाच
ततस्तेन तथोक्ते तु प्रीता देवास्तथाब्रुवन्।
ब्रह्मन् साध्विदमुक्तं ते हितं सर्वदिवौकसाम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
शल्य कहते हैं - हे राजन! देवतागण उनकी सलाह से बहुत प्रसन्न हुए और बोले - 'ब्रह्मन्! आपने बहुत अच्छी बात कही है। यह सब देवताओं के हित में है॥ 27॥
 
Shalya says - O King! The gods were very pleased with his advice and said - 'Brahman! You have said a very good thing. This is in the interest of all the gods.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)