श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.12.26 
बहुविघ्न: सुरा: काल: काल: कालं नयिष्यति।
गर्वितो बलवांश्चापि नहुषो वरसंश्रयात्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे देवताओं! काल अनेक प्रकार के क्लेशों से भरा हुआ है। इस समय आपके आशीर्वाद के प्रभाव से नहुष शक्तिशाली और अभिमानी हो गया है। काल ही उसे मृत्यु के मुख में पहुँचा देगा॥ 26॥
 
O Gods! Time is filled with many kinds of troubles. At this time Nahush has become powerful and proud due to the effect of your blessings. Time itself will send him to the jaws of death.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)