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mahabharat 5.12.23: हे श्रेष्ठ देवताओं! जो कुछ उनके लिए हितकर हो और जो मेरे लिए भी हितकर हो, वही तुम सब लोग करो। मैं शची को कभी नहीं दूँगा॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 5.12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.12.23 
अस्या हितं भवेद् यच्च मम चापि हितं भवेत्।
क्रियतां तत् सुरश्रेष्ठा न हि दास्याम्यहं शचीम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ देवताओं! जो कुछ उनके लिए हितकर हो और जो मेरे लिए भी हितकर हो, वही तुम सब लोग करो। मैं शची को कभी नहीं दूँगा॥ 23॥
 
O great gods! Whatever is beneficial for them and which is also beneficial for me, you all should do that. I will never give away Shachi.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)