श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.12.22 
एतदेवं विजानन् वै न दास्यामि शचीमिमाम्।
इन्द्राणीं विश्रुतां लोके शक्रस्य महिषीं प्रियाम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
अतः ब्रह्माजी के उपदेशानुसार मैं शरणागत को त्यागने से होने वाले पाप को भली-भाँति जानता हूँ; अतः मैं शचीदेवी को, जो सम्पूर्ण जगत में इन्द्र की पत्नी तथा देवराज इन्द्र की प्रिय रानी के रूप में विख्यात हैं, नहुष को नहीं दूँगा।
 
Thus, as per the teachings of Brahmaji, I am well aware of the sin that occurs by abandoning one who has sought refuge; therefore, I will not hand over Sachi Devi, who is renowned in the entire world as the wife of Indra and the beloved queen of the king of gods, to Nahush.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)