श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.12.2 
देवराज जहि क्रोधं त्वयि क्रुद्धे जगद् विभो।
त्रस्तं सासुरगन्धर्वं सकिन्नरमहोरगम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
देवराज! आप अपना क्रोध त्याग दीजिए। प्रभु! आपके क्रोध के कारण राक्षस, गंधर्व, किन्नर और महानाग सहित सारा जगत भयभीत हो गया है॥ 2॥
 
Devraj! Please give up your anger. Lord! Because of your anger, the entire world including the demons, Gandharvas, Kinnars and Mahanaags have become afraid.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)