न तस्य बीजं रोहति रोहकाले
न तस्य वर्षं वर्षति वर्षकाले।
भीतं प्रपन्नं प्रददाति शत्रवे
न स त्रातारं लभते त्राणमिच्छन्॥ १९॥
अनुवाद
जो मनुष्य भय के मारे शरणागत को शत्रु के हाथ में सौंप देता है, उसके बोए हुए बीज समय पर अंकुरित नहीं होते, समय पर वर्षा नहीं होती और जब भी वह शरण मांगता है, तब भी उसे कोई रक्षक नहीं मिलता॥19॥
‘The one who, out of fear, hands over a person who has come seeking refuge to his enemy, his sowed seeds do not germinate in time. He does not receive rain at the right time and whenever he seeks protection, he does not find anyone to protect him.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥