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mahabharat 5.12.16: बृहस्पति ने कहा- इन्द्राणी! मैं शरणागत को नहीं त्याग सकता, यह मेरा दृढ़ निश्चय है। अनिन्दिते! तुम धर्म को जानने वाली और सत्यनिष्ठ हो, इसलिए मैं तुम्हें नहीं त्यागूँगा॥ 16॥   |   mahabharat अध्याय 5.12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.12.16 
बृहस्पतिरुवाच
शरणागतं न त्यजेयमिन्द्राणि मम निश्चय:।
धर्मज्ञां सत्यशीलां च न त्यजेयमनिन्दिते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
बृहस्पति ने कहा- इन्द्राणी! मैं शरणागत को नहीं त्याग सकता, यह मेरा दृढ़ निश्चय है। अनिन्दिते! तुम धर्म को जानने वाली और सत्यनिष्ठ हो, इसलिए मैं तुम्हें नहीं त्यागूँगा॥ 16॥
 
Brihaspati said- Indraani! I cannot abandon the one who has taken refuge, this is my firm resolve. Anindite! You are knowledgeable about Dharma and truthful; hence I will not abandon you.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)