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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना
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श्लोक 14
श्लोक
5.12.14
एवमुक्ता तु सा देवी बाष्पमुत्सृज्य सस्वनम्।
उवाच रुदती दीना बृहस्पतिमिदं वच:॥ १४॥
अनुवाद
देवताओं के ये वचन सुनकर देवी शची अत्यन्त विलाप करने लगीं और बृहस्पतिदेव से दयनीय स्वर में इस प्रकार कहने लगीं-॥14॥
On hearing these words of the Gods, Goddess Shachi began to cry profusely and addressed Brihaspati in a pitiable tone and said thus:॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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