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mahabharat 5.12.11: वे बोले - 'हे देवर्षि प्रवर! विप्रेन्द्र! हमें ज्ञात हुआ है कि इन्द्राणी आपकी शरण में आई है और आपके घर में रह रही है। आपने उसे अभयदान दिया है॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 5.12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.12.11 
जानीम: शरणं प्राप्तामिन्द्राणीं तव वेश्मनि।
दत्ताभयां च विप्रेन्द्र त्वया देवर्षिसत्तम॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वे बोले - 'हे देवर्षि प्रवर! विप्रेन्द्र! हमें ज्ञात हुआ है कि इन्द्राणी आपकी शरण में आई है और आपके घर में रह रही है। आपने उसे अभयदान दिया है॥ 11॥
 
They said, 'O Devarshi Pravar! Viprendra! We have come to know that Indrani has come to your refuge and is staying in your house. You have given her protection.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)