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mahabharat 5.12.1: शल्य कहते हैं- युधिष्ठिर! देवराज नहुष को क्रोध में भरा हुआ देखकर देवतागण ऋषियों को उनके पास ले गए। उस समय उनकी दृष्टि अत्यंत भयानक प्रतीत हो रही थी। देवताओं और ऋषियों ने कहा-॥1॥   |   mahabharat अध्याय 5.12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 12: देवता-नहुष-संवाद, बृहस्पतिके द्वारा इन्द्राणीकी रक्षा तथा इन्द्राणीका नहुषके पास कुछ समयकी अवधि माँगनेके लिये जाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.12.1 
शल्य उवाच
क्रुद्धं तु नहुषं दृष्ट्वा देवा ऋषिपुरोगमा:।
अब्रुवन् देवराजानं नहुषं घोरदर्शनम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
शल्य कहते हैं- युधिष्ठिर! देवराज नहुष को क्रोध में भरा हुआ देखकर देवतागण ऋषियों को उनके पास ले गए। उस समय उनकी दृष्टि अत्यंत भयानक प्रतीत हो रही थी। देवताओं और ऋषियों ने कहा-॥1॥
 
Shalya says- Yudhishthira! Seeing Devraj Nahush filled with anger, the gods led the sages to him. At that time his gaze appeared very terrifying. The gods and sages said-॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)