श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 119: गालवका छ: सौ घोड़ोंके साथ माधवीको विश्वामित्रजीकी सेवामें देना और उनके द्वारा उसके गर्भसे अष्टक नामक पुत्रकी उत्पत्ति होनेके बाद उस कन्याको ययातिके यहाँ लौटा देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.119.14 
पूर्णान्येवं शतान्यष्टौ तुरगाणां भवन्तु ते।
भवतो ह्यनृणो भूत्वा तप: कुर्यां यथासुखम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार आपके आठ सौ घोड़ों की संख्या पूरी हो जाए और मैं आपके ऋण से मुक्त होकर सुखपूर्वक तपस्या करूँ, ऐसी कृपा आप मुझ पर करें।॥14॥
 
In this way may the number of your eight hundred horses be completed and may I be free from your debt and perform penance happily; please bless me with this favour.'॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)