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mahabharat 5.119.12: वह आकर बोला, 'गुरुदेव! ये छः सौ घोड़े आपकी इच्छानुसार आपको भेंट किए जाते हैं और शेष दो सौ के बदले में आप इस कन्या को स्वीकार करें॥12॥   |   mahabharat अध्याय 5.119: गालवका छ: सौ घोड़ोंके साथ माधवीको विश्वामित्रजीकी सेवामें देना और उनके द्वारा उसके गर्भसे अष्टक नामक पुत्रकी उत्पत्ति होनेके बाद उस कन्याको ययातिके यहाँ लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 119: गालवका छ: सौ घोड़ोंके साथ माधवीको विश्वामित्रजीकी सेवामें देना और उनके द्वारा उसके गर्भसे अष्टक नामक पुत्रकी उत्पत्ति होनेके बाद उस कन्याको ययातिके यहाँ लौटा देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.119.12 
अश्वानां काङ्क्षितार्थानां षडिमानि शतानि वै।
शतद्वयेन कन्येयं भवता प्रतिगृह्यताम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वह आकर बोला, 'गुरुदेव! ये छः सौ घोड़े आपकी इच्छानुसार आपको भेंट किए जाते हैं और शेष दो सौ के बदले में आप इस कन्या को स्वीकार करें॥12॥
 
He came and said, 'Gurudev! These six hundred horses are presented to you just as you wanted and in exchange for the remaining two hundred, please accept this girl.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)