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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 118: उशीनरका ययातिकन्या माधवीके गर्भसे शिबि नामक पुत्र उत्पन्न करना, गालवका उस कन्याको साथ लेकर जाना और मार्गमें गरुड़का दर्शन करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.118.6 
गुर्वर्थोऽयं समारम्भो न हयै: कृत्यमस्ति मे।
यदि शक्यं महाराज क्रियतामविचारितम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मैंने गुरुदक्षिणा देने के लिए यह कार्य आरम्भ किया है, अन्यथा मुझे इन घोड़ों की कोई आवश्यकता नहीं है। महाराज! यदि आप यह शुल्क दे सकें, तो बिना किसी संकोच के इस कार्य को पूर्ण कर दीजिए।
 
I have started this venture to pay Gurudakshina, otherwise I have no need for these horses. Maharaj! If it is possible for you to pay this fee, then complete this task without any second thoughts. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)