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mahabharat 5.118.2: गालव का मन अपने कार्य की सफलता के विचार में लगा हुआ था। मन में कुछ सोचते हुए, वह राजा उशीनर से मिलने के लिए भोजनगर की ओर चल पड़ा।॥2॥   |   mahabharat अध्याय 5.118: उशीनरका ययातिकन्या माधवीके गर्भसे शिबि नामक पुत्र उत्पन्न करना, गालवका उस कन्याको साथ लेकर जाना और मार्गमें गरुड़का दर्शन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 118: उशीनरका ययातिकन्या माधवीके गर्भसे शिबि नामक पुत्र उत्पन्न करना, गालवका उस कन्याको साथ लेकर जाना और मार्गमें गरुड़का दर्शन करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.118.2 
गालवो विमृशन्नेव स्वकार्यगतमानस:।
जगाम भोजनगरं द्रष्टुमौशीनरं नृपम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
गालव का मन अपने कार्य की सफलता के विचार में लगा हुआ था। मन में कुछ सोचते हुए, वह राजा उशीनर से मिलने के लिए भोजनगर की ओर चल पड़ा।॥2॥
 
Galava's mind was engaged in the thought of the success of his task. Thinking something in his mind, he traveled to Bhojnagar to meet King Ushinar.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)