श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 118: उशीनरका ययातिकन्या माधवीके गर्भसे शिबि नामक पुत्र उत्पन्न करना, गालवका उस कन्याको साथ लेकर जाना और मार्गमें गरुड़का दर्शन करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.118.14 
कामतो हि धनं राजा पारक्यं य: प्रयच्छति।
न स धर्मेण धर्मात्मन् युज्यते यशसा न च॥ १४॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मान! जो राजा अपनी इच्छा से दूसरे का धन दान करता है, उसे धर्म और यश की प्राप्ति नहीं होती॥14॥
 
Dharmatman! A king who donates someone else's wealth according to his own will, does not achieve Dharma and fame.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)