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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 118: उशीनरका ययातिकन्या माधवीके गर्भसे शिबि नामक पुत्र उत्पन्न करना, गालवका उस कन्याको साथ लेकर जाना और मार्गमें गरुड़का दर्शन करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.118.10 
श्रुतवानस्मि ते वाक्यं यथा वदसि गालव।
विधिस्तु बलवान् ब्रह्मन् प्रवणं हि मनो मम॥ १०॥
 
 
अनुवाद
विप्रवर गालव! आपकी सारी बातें मैंने सुन ली हैं। परन्तु विधाता तो शक्तिशाली हैं। मैं उनसे संतान प्राप्ति के लिए उत्सुक हूँ।
 
Vipravar Galav! I have heard everything you are saying. But the Creator is powerful. I am eager to have a child through him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)