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mahabharat 5.117.3: नारदजी कहते हैं - जब गालव ऋषि राजा दिवोदास के यहाँ गए, तब राजा दिवोदास ने उनका यथोचित स्वागत किया। तत्पश्चात, गालव ने उन्हें पूर्ववत् शुल्क देकर उस कन्या से संतान उत्पन्न करने के लिए प्रेरित किया॥3॥   |   mahabharat अध्याय 5.117: दिवोदासका ययातिकन्या माधवीके गर्भसे प्रतर्दन नामक पुत्र उत्पन्न करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 117: दिवोदासका ययातिकन्या माधवीके गर्भसे प्रतर्दन नामक पुत्र उत्पन्न करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.117.3 
नारद उवाच
तमुपागम्य स मुनिर्न्यायतस्तेन सत्कृत:।
गालव: प्रसवस्यार्थे तं नृपं प्रत्यचोदयत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
नारदजी कहते हैं - जब गालव ऋषि राजा दिवोदास के यहाँ गए, तब राजा दिवोदास ने उनका यथोचित स्वागत किया। तत्पश्चात, गालव ने उन्हें पूर्ववत् शुल्क देकर उस कन्या से संतान उत्पन्न करने के लिए प्रेरित किया॥3॥
 
Narada says- When sage Galav went to King Divodas's place, he was given a proper welcome by him. Thereafter, Galav paid him the fee as before and motivated him to have a child with that girl.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)